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Karnataka News: कर्नाटक के सरकारी कार्यक्रमों में अब वंदे मातरम के पहले दो पद, राजनीतिक विवाद के बीच सरकार का फैसला

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | Karnataka News | कर्नाटक सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पहले दो पद गाने का निर्देश दिया है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों को लेकर अलग प्रोटोकॉल का उल्लेख किया गया है।

कर्नाटक में सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के दो पद, आदेश के बाद सियासी बहस तेज

10 सितंबर, Alam Ki Khabar। बेंगलुरु से सामने आए नए घटनाक्रम में कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम के शुरुआती दो पदों के गायन या वादन को लेकर निर्देश जारी किया है। इस फैसले के बाद राष्ट्रगीत के पूरे संस्करण और पहले दो पदों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

राज्य सरकार के निर्देश के मुताबिक सामान्य सरकारी और आधिकारिक राज्य कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पहले दो पद ही गाए जाएंगे। वहीं राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल या केंद्र सरकार के प्रतिनिधित्व वाले विशेष कार्यक्रमों में लागू केंद्रीय प्रोटोकॉल के अनुसार पूरे संस्करण के गायन या वादन की व्यवस्था की जा सकती है।

केंद्र के प्रोटोकॉल के बीच आया फैसला

वंदे मातरम को लेकर केंद्र स्तर पर इस साल विस्तृत प्रोटोकॉल सामने आने के बाद देश में इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा बढ़ी है। कांग्रेस ने अपने स्तर पर लंबे समय से 1937 में लिए गए उस फैसले का हवाला दिया है, जिसके तहत सार्वजनिक और राष्ट्रीय आयोजनों में राष्ट्रगीत के पहले दो पदों को गाने की परंपरा पर जोर दिया गया था।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी पहले यह स्पष्ट कर चुके हैं कि राज्य सरकार कांग्रेस की इसी स्थिति के अनुसार सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहले दो पदों का ही पालन करेगी।

जम्मू-कश्मीर में भी सामने आया विवाद

वंदे मातरम को लेकर जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस और उसके सहयोगी दल नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच भी मतभेद सामने आए हैं। जम्मू-कश्मीर कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने एक कार्यक्रम में राष्ट्रगीत के पूरे संस्करण के गायन पर आपत्ति जताई और इसे भारत की विविधता तथा संवैधानिक भावना के संदर्भ में देखने की बात कही।

कांग्रेस की ओर से यह तर्क दिया गया है कि राष्ट्रगीत के पहले दो पदों का इस्तेमाल ऐतिहासिक रूप से राष्ट्रीय आयोजनों के लिए किया जाता रहा है और इस व्यवस्था के पीछे देश की विविधता को ध्यान में रखने की सोच रही है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस से पूछा सवाल

कांग्रेस के रुख पर नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से भी जवाब सामने आया। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कांग्रेस नेताओं से अपने ही राज्यों में होने वाले सरकारी कार्यक्रमों पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सरकारी कार्यक्रमों में लागू प्रोटोकॉल और राजनीतिक दल की विचारधारा को अलग-अलग देखा जाना चाहिए।

कर्नाटक का फैसला इसलिए भी अहम

कर्नाटक का नया निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वंदे मातरम के गायन को लेकर केंद्र और कांग्रेस के रुख में अंतर दिखाई दे रहा है। एक तरफ केंद्र के स्तर पर पूरे संस्करण के इस्तेमाल को लेकर प्रोटोकॉल पर जोर है, वहीं कांग्रेस ने अपने ऐतिहासिक फैसले के आधार पर पहले दो पदों की परंपरा को बनाए रखने की बात कही है।

अब कर्नाटक सरकार के इस आदेश के बाद आने वाले सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के गायन को लेकर प्रोटोकॉल का पालन किस तरह किया जाता है, इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी।

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फोटो कैप्शन: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार। File Photo, Alam Ki Khabar

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